144 साल बाद क्यों आता है महाकुंभ? पूरी जानकारी और यात्रा गाइड
महाकुंभ: 144 साल बाद क्यों होता है?
महाकुंभ मेला हिंदू धर्म का सबसे बड़ा और पवित्र धार्मिक आयोजन है। यह हर 12 साल में एक बार चार प्रमुख स्थानों – प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में आयोजित किया जाता है। लेकिन महाकुंभ विशेष रूप से 144 साल बाद ही आता है, और यह सिर्फ प्रयागराज में मनाया जाता है।
महाकुंभ के आयोजन का आधार ज्योतिषीय गणना होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, जब बृहस्पति मेष राशि में और सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, तब महाकुंभ का आयोजन होता है। यह संयोग हर 144 साल बाद बनता है, जिससे इस कुंभ को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
महाकुंभ में स्नान करने का महत्व
महाकुंभ को मोक्ष और पुण्य प्राप्ति के लिए सबसे शुभ अवसर माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदी का जल अमृत तुल्य हो जाता है। इस पावन समय में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
अगर आप महाकुंभ प्रयागराज 2025 में जाने की योजना बना रहे हैं, तो यह यात्रा गाइड आपके लिए बेहद मददगार होगी।
महाकुंभ में जाने का सही तरीका (Prayagraj Mahakumbh 2025 Travel Guide)
1. कैसे पहुंचे? (How to Reach Prayagraj Mahakumbh 2025)
रेलवे (By Train)
प्रयागराज जंक्शन और प्रयाग रेलवे स्टेशन सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन हैं।
भारतीय रेलवे मेले के दौरान विशेष ट्रेनें चलाता है।
स्टेशन से कुंभ मेला स्थल तक लोकल बसें और ई-रिक्शा उपलब्ध होते हैं।
हवाई मार्ग (By Air)
प्रयागराज का बमरौली एयरपोर्ट निकटतम हवाई अड्डा है।
लखनऊ (200 किमी) और वाराणसी (120 किमी) से प्रयागराज के लिए बसें और ट्रेनें मिलती हैं।
सड़क मार्ग (By Road)
प्रयागराज दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, पटना और अन्य बड़े शहरों से जुड़ा है।
मेले के दौरान सरकारी और निजी बसें चलाई जाती हैं।
अगर आप अपनी गाड़ी से आ रहे हैं, तो पार्किंग व्यवस्था की जानकारी पहले ही कर लें।
2. कहां रुकें? (Where to Stay in Prayagraj Mahakumbh 2025)
महाकुंभ में लाखों श्रद्धालु आते हैं, इसलिए ठहरने की व्यवस्था पहले से कर लेनी चाहिए।
टेंट सिटी: सरकारी और निजी टेंट कॉलोनियां अस्थायी रूप से बनाई जाती हैं।
धर्मशालाएं: शहर के कई मंदिरों और धार्मिक संगठनों की धर्मशालाएं उपलब्ध हैं।
होटल और गेस्ट हाउस: प्रयागराज के होटल और गेस्ट हाउस पहले से बुक करवा लें।
महाकुंभ के ठहरने की पूरी जानकारी और बुकिंग के लिए www.touringgudie.in पर जाएं।
3. कहां स्नान करें? (Best Ghats for Snan in Mahakumbh 2025)
महाकुंभ के दौरान सबसे महत्वपूर्ण स्नान स्थान हैं:
संगम घाट – सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण स्नान स्थल।
राजा घाट – कम भीड़ और साफ पानी के लिए बेहतर।
दशाश्वमेध घाट – ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाला घाट।
महाकुंभ प्रयागराज 2025 के प्रमुख स्नान तिथियों और गाइड के लिए www.touringgudie.in पर विजिट करें।
4. किन बातों का रखें ध्यान? (Important Tips for Mahakumbh Visit)
बहुत भीड़ होती है, इसलिए सामान और मोबाइल का ध्यान रखें।
प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइंस का पालन करें।
ज्यादा ठंड में गीले कपड़ों में न रहें, स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
परिवार के साथ जा रहे हैं तो बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें।
नकली साधु-संतों और ठगों से सावधान रहें।
गंगा जल की स्थिति और प्रदूषण (Ganga Pollution in Mahakumbh 2025)
हालांकि सरकार ने गंगा सफाई के लिए कई प्रयास किए हैं, फिर भी प्रदूषण की समस्या बनी हुई है।
कुंभ के दौरान गंगा की शुद्धता बनाए रखने के लिए विशेष जल शुद्धिकरण संयंत्र लगाए जाते हैं।
यात्रियों को प्लास्टिक और कूड़ा न फैलाने की सलाह दी जाती है।
अगर आप गंगा में डुबकी लगा रहे हैं, तो पानी पीने से बचें और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतें।
क्या अब भी लोग जा रहे हैं स्नान के लिए?
हालांकि शाही स्नान और प्रमुख मुहूर्त समाप्त हो चुके हैं, फिर भी श्रद्धालु अभी भी गंगा स्नान के लिए आ रहे हैं।
इसका कारण धार्मिक आस्था और पुण्य की कामना है। लोग मानते हैं कि किसी भी दिन गंगा में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति संभव है।
अगर आप भी महाकुंभ के बाद गंगा स्नान की योजना बना रहे हैं, तो यह जानने के लिए www.touringgudie.in पर विजिट करें।